Mathura Boat Accident: सामने आया हादसे का लाइव वीडियो, चश्मदीद की जुबानी पूरी कहानी; टल सकता था हादसा अगर

 

Mathura Boat Accident: सामने आया हादसे का लाइव वीडियो, चश्मदीद की जुबानी पूरी कहानी; टल सकता था हादसा अगर


न्यूज डेस्क, legal dost  Published by: संजीव सिंह Updated Mon, 13 Apr 2026  07:35 PM IST

सार

वृंदावन केसी घाट पर शुक्रवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया, जिसने जिम्मेदारों की लापरवाही की पोल खोल दी है। यमुना रिवर फ्रंट परियोजना के तहत पांटून पुल को हटाया जा रहा है। इस दौरान बिना किसी सुरक्षा प्रबंध क्षेत्र को प्रतिबंधित किए ही जेसीबी से पीपों को खींचकर हटाया जा रहा था। इसी की चपेट में आकर मोटरबोट पलट गई और 10 लोगों की जान चली गई।

''सब खुश थे। नाव में सभी कीर्तन कर आगे बढ़ रहे थे। अचानक बोट पुल की तरफ बढ़ने लगी तो हमने कई बार नाविक से कहा कि रुक जाओ। चार बार कहा पर वह नहीं माना और पलक झपकते ही नाव जा टकराई। हाहाकार मच गया।'' यह कहते हुए तनिश फफक उठे। तनिश इसी नाव में सवार थे और उन्होंने इस घटना की पूरी कहानी बयां की।



यमुना में डूबते श्रद्धालु












आंखों के सामने हुआ पूरा हादसा

घटना के लुधियाना निवासी तनिश बेहद व्यथित थे। उनकी आंखों के सामने ही पूरा हादसा हुआ था और उनकी भी जान जाते जाते बची थी। अश्रुपूरित नेत्रों से उन्होंने पूरे हादसे के बारे में बताया। बोले....''सभी नाव में सवार होकर चले थे। खुश थे और संकीर्तन कर रहे थे। हवा तेज चल रही थी तो जैसे उन्हें यह आभास हो गया कि कुछ गड़बड़ी हो सकती है। नाव तेजी से पुल की तरफ चली तो उन्होंने नाविक को चेताया। बीच में एक बार नाव लहराई। इस पर नाव सवार श्रद्धालु बोले कि ज्यादा लोग हैं। कम कर लीजिए। इससे पहले भी चार लोगों को दूसरी नाव में शिफ्ट किया जा चुका था पर नाविक नहीं माना। बोला, कोई नई बात नहीं है। चलते हैं और नाव आगे बढ़ाता गया और जैसे ही वह पुल के पास पहुंचा तो नाव के एंकर यानि लंगर में नाव टकराई और पलक झपकते ही क्रैश हो गई।''














नाविक न खुद कूदा और न ही किसी को पुकारा

बताते बताते तनिश की आंखों से आंसू बह उठे। बोले, नाव के पलटते ही उसमें सवार लोग गिर गए। कुछ तब तक नाव में ही बचे थे जो चिल्लाए कि गोताखोर बुलाओ पर तत्काल कोई नहीं आया। नाविक न खुद कूदा और न ही किसी को पुकारा। हमने अपने लोगों को खुद ही खींचने की कोशिश की। हाथ तक छिल गए पर इस दौरान पूरी नाव डूबने लगी। किसी तरह कूदे और कुछ तैरकर निकले। कुछ को बाकी गोताखोरों ने आकर बचाया पर यहां न एंबुलेंस आई और न ही अन्य कोई सुविधा। श्रद्धालुओं में शामिल श्वेत जैन ने मथुरा से बताया कि यमुना में पीपों का पुल बनाया गया था। जलस्तर बढ़ने के बाद इन्हें खोल दिया गया। इसके बाद यह पुल यमुना में बहने लगे। इनसे टकराकर उनकी मोटरबोट पलट गई।


तीसरी बार में पलट गई बोट

उन्होंने बताया कि जब मोटरबोट डूबी तो आसपास के किश्ती वालों ने कईयों को बचा कर अपनी किश्ती में बिठा लिया। श्वेत ने बताया कि हमारी मोटरबोट जब पीपा पुल के पास पहुंची तो लोगों ने नाविक से कहा कि पुल आने वाला है, रोक लीजिए लेकिन उसने मोटरबोट को नहीं रोका। मोटरबोट 2 बार पीपा पुल से टकराने से बचा। तीसरी बार में टक्कर होने के बाद वह पलट गई। एडवोकेट संदीप गुप्ता की पत्नी सीमा गुप्ता ने बताया कि बताया कि हादसे की जानकारी जैसे ही आश्रम में मौजूद श्रद्धालुओं को मिली सभी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया।
















4500 रुपये लिया गया था किराया

नदी से सकुशल बाहर निकाले गए श्रद्धालुओं में जगरांव के रहने वाले सुनील कुमार की पत्नी, यशु पुत्र रमेश बजाज और लवेश के नाम सामने आए हैं। इसके अलावा मोगा और लुधियाना के दुगरी का एक श्रद्धालु भी अस्पताल में ही है। वृंदावन की इस 4 दिन की यात्रा का 4500 रुपया किराया लिया गया था। बस में जगरांव के साथ लुधियाना, मोगा और मुक्तसर के कुछ लोग भी सवार थे। पीड़ित परिवारों के परिजन मथुरा के लिए रवाना हो गए।












लापरवाही से हटा रहे थे पांटून पुल

वृंदावन केसी घाट पर हुए हादसे ने जिम्मेदारों की लापरवाही की पोल खोल दी है। यमुना रिवर फ्रंट परियोजना के तहत पांटून पुल को हटाया जा रहा है। इस दौरान बिना किसी सुरक्षा प्रबंध क्षेत्र को प्रतिबंधित किए ही जेसीबी से पीपों को खींचकर हटाया जा रहा था। इसी की चपेट में आकर मोटरबोट पलट गई और 10 लोगों की जान चली गई। दोपहर करीब 2:30 बजे के करीब 37 लोग केसी घाट पर पहुंचे। वहां से श्रद्धालु दो मोटरबाेट में सवार हुए। डूबने वाली मोटरबोट में 37 लोग सवार थे। यमुना में जब नाविक बोट को दौड़ने लगा तो कुछ जगह पर लोगों को डर लगने लगा। कुछ लोगों ने चालक से मोटरबोट की स्पीड कम करने को कहा लेकिन चालक ने एक न सुनी और कहा कि हम लोगों को रोज का काम है।













कम पानी की वजह से खोया नियंत्रण

वह मोटरबोट को पांटूल पुल के पास ले गया। जहां यमुना रिवर फ्रंट के कार्य के चलते पांटून पुल को हटाया जा रहा था, यहां पुल के पास यमुना में पानी भी कम था। मोटरबोट वहां आकर रुक गई। चालक ने उसे चलाने के लिए स्पीड़ बढ़ाई तो बोट अनियंत्रित होने लगी। इस पर फिर लोगों ने चालक से कहा कि अब बोट को आगे नहीं ले जाओ, वापस ले चलो लेकिन चालक ने फिर लोगों की बातों को अनुसना कर दिया और बोट की स्पीड बढ़ा दी। अचानक तेज गति से मोटरबोट बढ़ी और हवा के झोंके से पांटून पुल से टकरा गयी। पुल की टक्कर लगते ही बोट अनियंत्रित होने लगी। बोट में सवार लोग एक तरफ हो गए। एक तरफ वजन बढ़ने के कारण मोटरबोट नदी में पलट गई।














पलटते ही बचाने को दौड़ गोताखोर

हादसे के तुरंत बाद ही गोताखोर लोगों को बचाने के लिए यमुना में उतर गए। कुछ लोग अपनी मोटरबोट लेकर भी आए लेकिन जब तक लोग यमुना में समा गए थे। किसी प्रकार लोगों को बाहर निकालने के लिए रेसक्यू शुरू किया गया। हादसे में 10 लोगों की जिंदगी यमुना में बह गईं।














कल नंदगांव में होना था फूल बंगला, करना था संकीर्तन

वृंदावन में हादसे का शिकार हुए श्रद्धालुओं का कार्यक्रम शनिवार को नंदगांव में था। उन्हें यहां फूलबंगला सजाकर संकीर्तन करना था। सारी तैयारियां हो चुकी थीं पर क्या पता था कि इस तरह का हादसा हो जाएगा और सारी खुशियां मातम में बदल जाएंगीं। नंदगांव के सेवायत कान्हा गोस्वामी ने बताया कि अधिकतर श्रद्धालु पंजाब के निवासी थे और धार्मिक प्रवृत्ति के थे। वे हर तीन-चार महीने में ब्रज और वृंदावन दर्शन के लिए आते रहते थे। नंदगांव में आज उनके द्वारा फूल बंगला और भजन संध्या का आयोजन प्रस्तावित था, जिसकी तैयारियां भी लगभग पूरी हो चुकी थीं। इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह था, लेकिन हादसे की खबर आते ही माहौल गमगीन हो गया। सूचना मिलते ही कान्हा गोस्वामी भी घटनास्थल की और दौड़ पड़े। उन्होंने फफकते हुए कहा कि क्या पता था ऐसा होगा। जो लोग इतने खुश थे वे इस तरह हादसे में अपनी जान गंवा बैठेंगे।

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